Monday, 30 April 2018

विरोध

हम जिसकी अवहेलना करते हैं उसे आकर्षित नहीं कर सकते! सारी बुराइयाँ हमारी अंधकारमय समझ, अज्ञान, जीवन के झूठे विश्लेषण और अवचेतन मन के दुरुपयोग के कारण पैदा होती हैं! हमारी तनख्वाह नहीं बढ़ती है क्योंकि हम खुद बॉस के प्रति मानसिक विरोध रखकर अवचेतन रूप से उस कंपनी से अपने बंधन तोड़ रहे हैं! यदि बॉस हमें कंपनी से निकालता है तो समझिए एक तरह से हमने ही खुद को निकलवाया है! यह क्रिया और प्रतिक्रिया के नियम का एक उदाहरण मात्र है! वास्तव में क्रिया हमारा विचार है और प्रतिक्रिया हमारे अवचेतन मन की है!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Sunday, 29 April 2018

कर्म-फल

कर्म का सिद्धांत है कि हम जैसा कर्म करेंगे हमें वैसा ही फल मिलेगा चाहे वह ग्रामीण-परिवेश ही क्यों न हो? हम खुद ही अपने आप के भाग्यविधाता हैं। यह बात ध्यान में रखकर ही हमें अभी से कठोर परिश्रम में लग जाना चाहिए।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Saturday, 28 April 2018

अपनापन

अगर गिलास दूध से भरा हुआ है तो हम उसमें और दूध नहीं डाल सकते लेकिन हम उसमें शक्कर डालें तो शक्कर अपनी जगह बना लेती है और अपना होने का अहसास दिलाती है ठीक उसी प्रकार अच्छे लोग हर किसी के दिल में अपनी जगह बना  लेते हैं!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Friday, 27 April 2018

सृजनात्मक विचार

हमारा अवचेतन हमें चक्रवृद्धि ब्याज देता है! जिसमें दौलत की भावना है उसे अधिक दौलत दी जाएगी, जिसमें कमी की भावना है उसे कम दिया जाएगा! हम जिस चीज को अपने अवचेतन में जमा करते हैं, यह उस चीज को कई गुणा कर देता है और बढ़ा देता है! हर सुबह जब हम जागें तो समृद्धि, सफलता, दौलत और शांति के विचार जमा करें! इन अवधारणाओं पर सोचें! अपने मस्तिष्क को उनके साथ अधिकतम व्यस्त रखें! ये सृजनात्मक विचार जमा राशि की तरह हमारे अवचेतन मन में पहुँच जायेंगे और प्रचुरता तथा समृद्धि ले आएँगे!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Thursday, 26 April 2018

सकारात्मक सोच

जब हम इसतरह की बात करते हैं, "काम चलाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं!"  "काफी तंगी है!" "कर्ज की किश्त नहीं चुकाने के कारण मैं अपना घर गँवा दूँगा!" जब हम भविष्य के बारे में डरते हैं तब हम एक कोरा चेक लिख रहे हैं और नकारात्मक परिस्थितियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं! हमारा अवचेतन मन हमारे डर तथा नकारात्मक कथन को हमारे आग्रह के रूप में स्वीकार करता है फिर वह अपने तरीके से काम शुरु कर देता है जिससे हमारे जीवन में बाधाएं, विलंब, कमी और सीमाएँ पैदा हो जाती हैं? अतः हमें नकारात्मक सोच से बचना चाहिए! हमें अवचेतन मन की शक्तियां पहचान कर सदैव सकारात्मक सोच ही अपनानी चाहिए!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Wednesday, 25 April 2018

अवचेतन मन की शक्तियां

अवचेतन मन की शक्तियां बड़ी विचित्र संग्रह करती हैं! हमारी सकारात्मक घोषणा तब सबसे अच्छी तरह सफल होती है जब यह विशिष्ट होती हो और मानसिक संघर्ष या विवाद पैदा न होता हो! हमारा अवचेतन निरर्थक शब्दों या वाक्यों को स्वीकार नहीं करता है! यह तो सिर्फ उन्हें स्वीकार करता है जिन्हें हम सचमुच सत्य मानते हैं! अवचेतन मन हमेशा प्रबल विचार या विश्वास को स्वीकार करता है!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Tuesday, 24 April 2018

दुनिया का खेल

देखो रे लाला दुनिया का खेल निराला
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वो कैसा साधु बन बैठा नहीं समझ में आया
दिन को बैठे माला फेरे रात में डाका डाला
देखो रे लाला...................................
बाप उठाकर हल कंधे पर गया जोतने खेत
खूब कमाया बेटा खातिर रुपये कर दी ढाला
देखो रे लाला.....................................
बेटा चला पढ़न पटना को रुपए-पैसे लेकर
चला सिनेमा छोड़ पढ़ाई कमरे में लगाया ताला
देखो रे लाला......................................
बिछा खाट पत्नी बैठी,पति जी आये अॉफिस से
तेललगा पत्नी के बदन उसने मालिश कर डाला
देखो रे लाला......................................
कभी न खाए हलवा-पूड़ी खाया सबदिन रोटी
आज मिला घी का पूड़ी घर में आया जो साला
देखो रे लाला......................................
सास-ससुर पैसे के खातिर गली-गली हैं मारे
पर पतोहू अपने रुपए को ब्याज में दे डाला
देखो रे लाला......................................
बेटी की शादी है घर में बाप है ग़म के मारे
बेटा को है फिकर नहीं चाहे बाप हो मरनेवाला
देखो रे लाला.......................................
आज दिवाकर रंगमंच पर सुना रहा यह गाना

Monday, 23 April 2018

एकाधिकार

जब ग्रामीण-परिवेश हमें किसी ओर खींच रहा हो तब हम समान अधिकार का बल प्रयोग करते हुए दूसरी नजर रखें, यदि हम प्रचंड बल का प्रयोग करेंगे तो हम नष्ट हो जायेंगें और यदि हम क्षीण बल का तंत्र प्रयोग करेंगे तो ग्रामीण-परिवेश हमें नष्ट कर देगा! हमें क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम और कानून याद रखना चाहिए! अपनी प्रतिक्रिया को हमें क्रिया के अनुसार ही तय करना चाहिए!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Sunday, 22 April 2018

बीज

यदि हम अपने खेत में बीज न डालें तो कुदरत उसे घास-फूस से भर ही डालेगी! ठीक उसी प्रकार यदि हम अपने दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही डालेंगे। अतः हमें अवचेतन मन की शक्तियां प्रभावी करने के लिए चेतन मन को सकारात्मक विचार से भरते रहना चाहिए ताकि नकारात्मक सोच को अपनी जगह बनाने का अवसर ही न मिले!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Saturday, 21 April 2018

परिवर्तन का रोना

भारतीय राजनीति के टिमटिमाते तारे हैं आजकल के राजनीतिज्ञ। जो राजनीतिज्ञ जनहितार्थ सपने को साकार करते हैं वे ही धूमकेतु कहलाते हैं जैसे भगत सिंह। यदि हम उनके आभार को नहीं मानते हैं तो यह हमारी कृतघ्नता है। कुछ ऐसे कार्य किए जा रहे हैं जो धरातल पर नहीं उतर सके हैं केवल कागज के पन्नों पर अंकित हैं। यह कैसा निर्माण है? सत्ता-सुख-भोग के कारण ही आज हिंदुस्तान की मान मर्यादा धूमिल है। शिकायत की सुनवाई भी नहीं हो पाती है जिसका जीता-जागता प्रमाण है कि म. बि. ग्रा. बैं. शाखा कार्यालय गोपालबाद प्रखंड सरमेरा जिला नालन्दा राज्य बिहार पिन कोड 8111O4 में बैंक कर्मियों द्वारा 2012 में ही लगभग 7 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ जिसकी शिकायत मुख्य मंत्री नीतीश कुमार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई परंतु उसकी जांच अभी तक नहीं हो पाई है। धन्य हो एहसान और धन्य हो कल्याण। कैसे कहा जाय जय-जय विज्ञान हो, जय हिंदुस्तान? चुनाव का समय भी बड़ा अजीब होता है। सारे उम्मीदवार चुनाव के दौरान लोक लुभावन नारों के साथ जनसेवा की भावना से प्रेरित हो जनता को परिवर्तन का भरोसा दिलाते हैं। वही उम्मीदवार जब जीतकर आते हैं तो जनता के प्रति किये गये वादों को भूल जाते हैं। आखिरकार जनता किंकर्तव्यविमूढ़ हो परिवर्तन का केवल रोना रोती रहती है। पता नहीं चल पाता है कि लुटने वाला कौन और लूटने वाला कौन है? आखिर जनता भरोसा करे तो किसपर करे? अनुमान किया जा रहा है कि हमारा बिहार फिर से गुलजार होगा पर ऐसा हुआ या नहीं यह आप ही बता सकते हैं। सरकार में अंतर्विरोध कितना है यह आपके सामने परिलक्षित है।

Friday, 20 April 2018

सद्विचार

न्याय के साथ विकास और सुशासन ही
देश को महान बनाता है।
वही मेरा सच्चा दोस्त है जो उक्त विचार
के साथ मुझे अपनाता है।

दुनिया चाहे मुझे धोखेबाज कहे
पर मैं वही करता हूँ जो मुझे भाता है।
मैं उसे साथ देता हूँ तभी तक
जबतक वह सद्विचार अपनाता है।

मेरा स्थायित्व तभी संभव है
जब कोई खरा उतर आता है।
कुविचार जब उपजता है उसके मन में
मेरा मन किसी और को अपनाता है।

।। श्री परमात्मने नमः।।

Thursday, 19 April 2018

आध्यात्मिक चेतना

आध्यात्मिक चेतना का अभाव आज मानव को क्रूर बना दिया है। मानव में मानवता नहीं है तो वह पशु तुल्य है। अतः मानव में मानवता लाने के लिए हमें आध्यात्मिक चेतना को जगाना होगा।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Wednesday, 18 April 2018

नजारा

कहानी बदल सकती है, फसाना बदल सकता है।
नगमें बदल सकते हैं, तराना बदल सकता है।।
शर्त यह है कि हम अपनी निगाहें बदलें, फिर क्या
ग्रामीण-परिवेश का नजारा भी बदल सकता है।।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Tuesday, 17 April 2018

पहुँच

आत्मा तक जाने के लिए प्रेम प्रवेश द्वार है और परमात्मा तक जाने के लिए आत्मा दरवाजा है।
।। श्री परमात्मने नमः।। https://t.co/TfvgD0e4DS

Monday, 16 April 2018

माया

यह जग है एक सपना यारो, माया ही है माया
रिश्तों के उजालों में देखो हर आदमी ही है साया
यहाँ कोई नहीं है अपना यारो जगत है पराया
इंसान भटकता गली-गली, है ऐसा युग आया
कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ? रावण के इतिहास को
क्या बतलाऊँ राम को, किसने है मार गिराया?
।। श्री परमात्मने नमः।।

Sunday, 15 April 2018

मज़हब मुक्त हिंदुस्तान

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में वैर रखना। मज़हब को देखकर हम इंसानियत की पहचान नहीं कर सकते परंतु ग्रामीण-परिवेश में मज़हबी इंसान की कमी नहीं है! हमें इससे बचना चाहिए! यह भ्रष्टाचार से भी खतरनाक विचारधारा है! हमें मज़हब-मुक्त भारत चाहिए! यह मेरी मौलिक विचारधारा है और कोई जरूरी नहीं कि सभी इससे सहमत हों। जो सहमत नहीं हैं उनसे मैं क्षमा चाहता हूँ।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Saturday, 14 April 2018

आस्था

अवचेतन की उपचारक शक्ति में आस्था हमारा इलाज कर सकती है! सोने से पूर्व हम अपने अवचेतन को किसी समस्या के जवाब खोजने का काम सौंपें, यह उसे कर देगा! हम चेतन रूप से जिसमें विश्वास करते हैं और जिसे सच मानते हैं वह हमारे मस्तिष्क, शरीर और परिस्थितियों में प्रकट हो जाएगा! अतः अच्छाई की घोषणा करें और जीवन की खुशी पाएँ!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Friday, 13 April 2018

असमंजस

संप्रति गाँव में जनमानस देखने योग्य है। जन-प्रतिनिधियों मेंं तो अर्थ-लूट की भावना चरमसीमा पर है। मनरेगा को तो लोग सबसे छोटी इकाई से लेकर सबसे बड़ी इकाई तक जितने कर्मचारी या पदाधिकारी हैं, खोखला समाज समझकर अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं। अभीतक तो खोटे सिक्के (खोटे जनप्रतिनिधि) ही बाजार में चल रहे हैं।
ग्रामीण-परिवेश में जाकर देखें कौन बडा कौन छोटा है?
कौन-सा सिक्का चल रहा और कौन-सा सिक्का खोटा है?
भारत हूं मैं, ये देश बचालो यारों! किसी नज़र को तेरा इंतजार आज भी है। इसी असमंजस में किसी भूले की खोज में एक शायर ने लिखा है-->
क्या बनाया देश का इतिहास तुमने
दूर तक पग चिह्न यदि छोड़े नहीं हैं?
दागकर नारे हवा में हाँकना मत
हम सजग इंसान हैं, घोड़े नहीं हैं ?
।। श्री परमात्मने नमः।।

Thursday, 12 April 2018

सकारात्मक ऊर्जा

आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा में तिलक और पुष्प के साथ कुछ मीठा और चावल जरूर होते हैं क्योंकि पूजा की विधि बिना चावलों के पूरी नहीं हो सकती। यही कारण है कि चावलों को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसे माथे पर तिलक के साथ लगाया जाता है। इसके इलावा पूजा में कुमकुम-तिलक के ऊपर चावल के दाने लगाए जाते हैं ताकि हमारे आस-पास जो नकारात्मक ऊर्जा हैं वो हमसे दूर जा सके या समाप्त हो सके। आधुनिकता के आगोश में प्राय: नवयुवक इसे लगाने से इनकार करते हैं। संप्रति लोग इसका विरोध भी  करने लगे हैं। शायद अब दुनिया सिमट रही है. उन्हें मालूम ही नहीं है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है परन्तु कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ?
।। श्री परमात्मने नमः।।

Wednesday, 11 April 2018

परिवर्तन

आदमी आज इतना पराधीन क्यों ?
कोई चिड़ियों को उड़ना सिखाता नहीं!
हमने देखा है गुमराह होते हुए
रास्ता खुद जो अपना बनाता नहीं!
पूरी होती नहीं है मनोकामना
ग्रामीण-परिवेश में परस्पर जो नाता नहीं!
किस तरह जी सकेंगे सभी गाँव में
प्यार से कोई रहना सिखाता नहीं!
समाज में यदि हम समरसता लाना चाहते हैं तो
अपने विचार में परिवर्तन तो लाना ही होगा।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Tuesday, 10 April 2018

ईश्वरीय अनुग्रह

अपने ऐबों और बुराइयों को देखते रहना और अंतकाल की चिंता रखना,जिनमें ये दो गुण हों वही सच्चे फकीर हैं,यही साधुता है। ऐसा स्वभाव बन जाना ईश्वरीय अनुग्रह के लक्षण हैं। भक्त का काम यह है कि अत्याचारी और दुश्मन के लिए भी कभी बुरा विचार दिल में न लाये और न कभी भगवान से उसे दण्ड देने के लिए प्रार्थना करे ऐसा करते ही भक्ति खंडित हो जाती है और यह अपराध उसका लिख लिया जाता है।
ग्रामीण-परिवेश में आजकल अपनी गलतियों, ऐबों और बुराइयों को कोई नहीं देखता है चाहे हम ही क्यों न हों! यही कारण है कि हम ईश्वरीय अनुग्रह से वंचित रह जाते हैं।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Monday, 9 April 2018

गलती

ग्रामीण-परिवेश में सबकुछ मिलती है बस गलती किसकी है यह नहीं मिलती! गलती यदि मिलती भी है तो अपनी गलती  कभी नहीं मिलती! हम आजीवन गलतियों को दूसरों के माथे मढ़ते के आदि हो गए हैं। नतीजतन ग्रामीण-परिवेश में उचित अनुचित का फैसला सटीक नहीं होता!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Sunday, 8 April 2018

शिक्षा

शिक्षा ही राष्ट्र की रीढ़ है। जो राष्ट्र शिक्षा-विहीन है उसका विकास ज्यादा बेहतर नहीं हो सकता इसीलिए हमने शिक्षा से वंचित गरीबों को मुफ्त शिक्षा देने काम किया है परन्तु अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि फिलहाल कोई भी बच्चे हमारे यहाँ पढ़ने नहीं आ रहे हैं।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Saturday, 7 April 2018

सकारात्मक सोच

'लोग क्या सोचेंगे' इस बात की चिंता कभी ना करें बल्कि अपने को सकारात्मक सोच में लगाए रखें।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Friday, 6 April 2018

कौन

ग्रामीण-परिवेश में हर शिकवे-गिले बच्चे सह लेते हैं,
जिंदगी तमाम हम बच्चे यूं ही कर लेते हैं!
बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?
दबंगों के हाथों ज़हर पी लेते हैं!
।। श्री परमात्मने नमः।।

Thursday, 5 April 2018

क्रोध

दस कसूरबार को छोड़ दीजिए मगर एक बेकसूर को सजा मत दीजिए परंतु कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ? आदमी क्रोध के वशीभूत हो समाज में कुछ भी करने को बाध्य हो जाता है। वह यह नहीं अवलोकन कर पाता है कि हमारे क्रोध का असर खुद हम ही पर प्रतिक्रिया करेगा ? दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि क्रोध करने का अर्थ ही है दूसरों की गलतियों का स्वयं से प्रतिशोध लेना। इसी क्रम में हम खुद स्वयं की हानि कर बैठते हैं। हम अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं कर पाते और उसे छिपाने के लिए दूसरों पर गलतियां मढ़ने लगते हैं। हम क्रोध के अधीनस्थ हो बेकसूर पर लांछन लगाने की भूल कर बैठते हैं और उसे दंडित कर बैठते हैं। नतीजतन हमारा जीवन दूभर हो जाता है। जिसदिन हम क्रोध के समय भी सकारात्मक सोच का आश्रय लेना शुरू कर देंगे उसीदिन हमारा जीवन सार्थक हो जायेगा।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Wednesday, 4 April 2018

अहंकार

हर घटना, हर स्थिति, हर व्यक्ति के व्यवहार से हमें सीखना चाहिए। हम अहंकार के कारण उनसे कुछ सीख नहीं पाते और स्वार्थ-पथ के अनुगामी बनकर रह जाते हैं। हमारा जन्म परमार्थ के लिए हुआ है। हमारे जीवन की सार्थकता तभी संभव है जब हम परमार्थ को अहमियत देंगे। यह भी सर्वविदित है कि अहंकार परमार्थ-पथ का सबसे बड़ा शत्रु है, यह जानते हुए भी हम स्वार्थमय जीवन जी रहे हैं। संप्रति ग्रामीण-परिवेश में परमार्थ का सर्वथा अभाव-सा दीख रहा है। हम कर्म-फल के वशीभूत हो सेवा से वंचित रह जाते हैं। हमें ज्ञात होना चाहिए कि जिस सेवा में कोई स्वार्थ न हो, छल न हो और किसी फल की कामना न हो वही सच्ची सेवा है तो आइए हम अहंकार तजकर आज ही सेवा का संकल्प लें ताकि हमारा जीवन सफल हो। माँ जगदंबे की आराधना भी अहंकार-रहित होनी चाहिए।
।। श्री परमात्मने नमः।।

Tuesday, 3 April 2018

स्वराज्य

कर्मयोग का ज्ञान नहीं, केवल ध्वज का सम्मान,
"मन की बात" कहूँ मैं किससे भारत देश महान।
सिसक रहा गणतंत्र हमारा अभी स्वराज्य अधूरा
तपोनिष्ठ बापू का सपना कैसे होगा पूरा ?
।। श्री परमात्मने नमः।।

Monday, 2 April 2018

मुक्ति

माँ ! हमारी भूल से जो-जो अपराध हमसे हुए हों उनको क्षमा करो! हमारे विचार शुद्ध करो और उनमें शक्ति दो, हम तेरी शरण आये हैं। हम आपकी आज्ञाओं का पालन नहीं कर सकते! इसमें हमारा केवल इतना अपराध है कि हमने तेरा सहारा नहींं  लिया, अबतक अपने ही बल भरोसे पर कूदते रहे और इसीलिए हमारी यह दशा हो रही है। हमने तेरे महत्व को नहीं जान पाया। हम अभीतक यही समझते रहे कि मनुष्य अपने उद्योग से भी कुछ कर सकता है। आज यह समझ आई है कि बिना तेरी दया और कृपा के वह सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है। वह तेरे बंधन में है। संसार तेरा बंदी गृह है। इससे शीघ्र हमारी मुक्ति करो माँ !

Sunday, 1 April 2018

वास्तविक विचार

जो भी तस्वीरें हमारे मन में होती हैं वह चाही गई अदृश्य चीजों का प्रमाण है। हम अपनी कल्पना में जो भी गढ़ते हैं वह हमारे शरीर के किसी अंग जितना ही वास्तविक होता है। विचार वास्तविक होते हैं और वे एक न एक दिन हमारी यथार्थवादी दुनिया में अवश्य प्रकट होंगे। शर्त केवल इतनी है कि हमें अपनी मानसिक तस्वीर के प्रति निष्ठावान रहना होगा। चिंतन की यह प्रक्रिया हमारे दिमाग पर छाप छोड़ देती है। यही छाप बाद में हमारे जीवन में तथ्य और अनुभव के रूप में सामने आती है। आर्किटेक्ट जिस तरह की इमारत बनाना चाहते हैं पहले उसकी तस्वीर ही तो देखते हैं जिसके अनुसार कॉन्ट्रैक्टर और भवन-निर्माता आवश्यक सामग्री इकट्ठा करते हैं फिर इमारत बनने लगती है। अंततः हम यही देखते हैं कि इमारत पूरी होने पर यह आर्किटेक्ट के मानसिक ढाँचे के अनुरूप होती हैं। किसी विचार के सूत्रीकरण का सबसे सरल और स्पष्ट तरीका यही है।
।। श्री परमात्मने नमः।।