Tuesday, 1 May 2018

थकन

पूछ रही है थकन पाँव की पगडंडी दिखला दो...२
हृदय मोम-सा पिघल रहा है,
सफर सुहाना निकल रहा है,
तन्हाई से डर लगता है, चुभ रही दिल में कीलें,
छूटे कुटुम्ब कबीले.......!
प्यार किया हूँ केवल तुमसे, एक बार मुस्का दो,
बस एक बार मुस्का दो..... पगडंडी दिखला दो...
टूट गए सपने.....हो न सके अपने......
तन्हाई से डर लगता है...चुभ रही दिल में कीलें...
छूटे कुटुंब कबीले...
प्यार किया हूँ केवल.............!
दिल में फूल खिले...अवसर यदि मिले.....
जो आँसू है तुमने सौंपे उनसे गिला नहीं है...
जीवन जो मिला नहीं है....?.
क्या बतलाऊँ ग़म का आलम........?
मंजिल तक पहुँचा दो....!
पगडंडी दिखला दो.... पगडंडी दिखला..!
(स्वरचित)                       दिवाकर प्रसाद,
                                     नालंदा (बिहार)
                                     मो. 8507358565

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