हम यदि इसकी दैनिक घोषणा करें और इसे अपने दिल में लिख लें तो दौलत की सतत आपूर्ति होती रहेगी! *मैं अपने अवचेतन मन की असीमित समृद्धि के साथ एकाकार हूँ! अमीर, खुश और सफल बनना मेरा अधिकार है! धन मेरी ओर मुक्तता से, प्रचुरता से और अनंत रूप से प्रवाहित हो रहा है! मैं हमेशा अपने सच्चे मूल्य के प्रति सचेत हूँ! मैं अपनी प्रतिभाओं को मुक्तता से देता हूँ और मुझे अत्यधिक वित्तीय वरदान मिलते हैं! यह अद्भुत है!*
।। श्री परमात्मने नमः।।
No comments:
Post a Comment