Wednesday, 16 May 2018

क्षणिक संबंध

ग्रामीण-परिवेश में हम क्षणिक संबंधों, क्षणिक वस्तुओं को अपना जान कर उससे आनंद मनाते हैं जबकि हर पल साथ रहने वाला शरीर भी हमें अपना ही गुलाम बना देता है! हमारी इन्द्रियां अपने आप से अलग कर देती है! यह इतनी सूक्ष्मता से करती है कि  हमें महसूस भी नहीं होता है कि हमने यह काम किया है ?
।। श्री परमात्मने नमः।।

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