आ गई आराधना अनुराग से आसक्ति तक गीत सीमित हो गए उठकर सभा से व्यक्ति तक साँझ से बैठो अगर तुम भोर तक तो कुछ कहूँ बात अब आ ही गई अनुभूति से अभिव्यक्ति तक ।। श्री परमात्मने नमः।।
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