Sunday, 20 May 2018

सफर

लोगों को ऐसा कहते सुना होगा कि वह बीमारी से मर गया! सुना है यह भी कि गिला मौत से नहीं है मुझे ज़िन्दगी ने मारा!  फिर जब कोई मरता है तो सुनते हैं बेचारा कैंसर से मर गया और मातम ही मातम! मरने का कारण तो जिन्दा होना है और जो जिन्दा है वही मरते हैं! एक मुसाफिर के सफर सी है दुनिया सबकी, किसी को अभी तो किसी को देर से जाना है तो फिर मौत पर मातम क्यों? शायद ये गम है अपनों से बिछड़ने का पर बिछरेगें सभी बारी बारी।
।। श्री परमात्मने नमः।।

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