अवचेतन मन की शक्तियां रात्रि-काल में अधिक सक्रिय होती हैं! अतः हम रात को सोते समय अपनी-अपनी आखें बंद कर यह स्मरण करें कि सुबह अपनी आखें खोलने से पहले हमारी जो चेतना सर्वप्रथम जगती है उस क्षण हमें किसका स्मरण होता है ? बस उसी का स्मरण अंत समय में भी होगा! अगर किसी को भगवान के अतिरिक्त किसी अन्य चीज़ का स्मरण होता हो तो अभी से वे अपने आप को सुधार लें और निश्चित कर लें कि हमारी आँखें खुलने से पहले हम अपने चेतन मन में भगवान का ही स्मरण करेंगे! बस हमारा काम बन जाएगा नहीं तो हम जीती बाज़ी भी हार जायेंगे!
।।श्री परमात्मने नमः।।
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