यदि हम किसी के प्रति कटु और ईर्ष्यालु हैं जो ज्यादा सफल और दौलतमंद बन गए हैं! अगर ऐसा है तो हम अपनी मुश्किलें खुद पैदा कर रहे हैं! उनके बारे में नकारात्मक विचार रखकर और उनकी दौलत की निंदा करके हम दौलत और समृद्धि को खुद से दूर कर रहे हैं! जरा सोचिए क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति के पास रुकना पसंद करेंगे जो हमारी निंदा करते हों? ज़ाहिर है नहीं और दौलत भी ऐसा नहीं करेगी! हम उसी चीज को दूर भगा रहे हैं जिसके लिए हम प्रार्थना कर रहे हैं! एक तरफ तो हम कह रहे हैं कि दौलत हमारी ओर प्रवाहित हो और दूसरी तरफ यह भी कह रहे हैं कि उस आदमी की दौलत गंदी और बुरी चीज है! यह विरोध ही गरीबी और दु:ख की राह का सूचक है! अतः यदि हम दौलतमंद बनना चाहते हैं तो हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हम दूसरे व्यक्ति की दौलत पर हमेशा खुश रहें!
।। श्री परमात्मने नमः।।
Wednesday, 2 May 2018
ईर्ष्या
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