Monday, 7 May 2018

निधि

दूसरों के प्रति घृणा, ईर्ष्या और वैमनस्य से मुक्त सहज व्यक्ति को कुछ छिपाने की आवश्यकता नहीं पड़ती! ऐसे ही व्यक्ति देश-दुनिया में कमाते हैं नाम चाहे वे गाँव-घर में हों गुमनाम..! हमें भी अपने विचार को संयमित रखने की जरूरत है क्योंकि संयत इच्छा से प्रेरित सदाचार करना ही चरित्र है जो मानव की स्थायी निधि है!
।। श्री परमात्मने नमः।।

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