Sunday, 9 April 2017

धर्म और मर्यादा

क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म एवं मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये।
।।श्री परमात्मने नमः।।

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