क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म एवं मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये। ।।श्री परमात्मने नमः।।
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