Monday, 17 April 2017

सहनशीलता

समय की आंच में तपकर निखरना सामान्य व्यक्ति के बस की बात नहीं है। पग-पग पर प्रतिकूलता से जूझने वाले लोहा लेते-लेते पारस पत्थर बन जाते हैं जैसे कोयला अधिक ताप के दबाव में हीरा बनकर गौरवान्वित होता है उसी प्रकार संकट सहते-सहते सामान्य मनुष्य महापुरुष बन जाता है। अत: महापुरुष बनने के लिए संकट तो सहना ही पड़ेगा।
              ।।श्री परमात्मने नमः।।

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