हम सबके भीतर आत्मा के रूप में परमात्मा ही वास करता है जो हमें प्रतिक्षण सरल एवं मधुर शब्दों द्वारा राह दिखलाता रहता है भले ही हममें सुनने का धैर्य ही न हो, हम उसकी कही बात को सुनते ही न हों। परिणामत: हम बारंबार अपनी गलतियों को दोहराते रहते हैं और दु:ख पाते रहते हैं। हमें परमात्मा के आज्ञा पालन को विकसित करना चाहिए तभी परमात्मा गुरु बनकर हमारा मार्गदर्शन करने का दायित्व लेगा।
।।श्री परमात्मने नमः।।
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