अपने अपने स्वाभाविक कर्मोंमें निष्काम भाव से तत्परतापूर्वक लगा हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेता है। जिस परमात्मा से संपूर्ण संसार पैदा हुआ है और जिससे यह संपूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्माका अपने कर्मोंके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धि को (परमात्माकोे) प्राप्त हो जाता है अर्थात् अपने स्वाभाविक कर्मोंमें लगा हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त होता है।
।।श्री परमात्मने नमः।।
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