Friday, 28 April 2017

सार्थकता

धन तभी सार्थक है जब धर्म भी साथ हो।
विशिष्टता तभी सार्थक है जब शिष्टता भी साथ हो। सुंदरता तभी सार्थक है जब चरित्र भी शुद्ध हो। संपत्ति तभी सार्थक है जब स्वास्थ्य भी अच्छा हो। देवस्थान गमन तभी सार्थक है जब हृदय में भाव हो। अच्छा व्यापार तभी सार्थक है जब व्यवहार भी अच्छा हो। विद्वता तभी सार्थक है जब सरलता भी साथ हो। प्रसिद्धि तभी सार्थक है जब मन में निरअहंकारिता हो।
बुद्धिमता तभी सार्थक है जब विवेक भी साथ हो। दोस्ती का होना तभी सार्थक है जब उसमें प्यार और विश्वास हो।
।।श्री परमात्मने नमः।।

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