जिसने इच्छारहित होकर अपने गुणों से समाज को लाभान्वित करना सीख लिया, संसार के मोह को त्यागकर संसार में रहना सीख लिया और आत्मा को विस्मृत कर परमात्म भाव में रहना सीख लिया वही परमात्मा के प्रति उत्तरदायी है। ।।श्री परमात्मने नमः।।
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