जंग लड़ रहे आज सब खंजर और तलवार से, खून खराबे से नहीं जीत मिले बस प्यार से। स्वार्थ सिद्धि के लिए मनुज मानव का लहू बहा रहा। प्रेम की ज्योति जलायें तो बस बैर मिटे संसार से।
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