अहसास सभी जब ख़त्म हुए तब प्रीत फ़रेब हुई जग में, दिल से दिल का अब मेल नहीं छल के सब शूल बिछे मग में. मत अश्रु बहा दिल आस जगा अब हिम्मत तू भर ले रग में, ख़ुद से ख़ुद की ख़ुद प्रीत जगा तब मुश्क़िल भी न मिले डग में.
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