हे सद्गुरु! हे दयानिधान !
तूने दिया है सच का ज्ञान।
भूल न जायें यह एहसान,
हे सद्गुरु! हे दयानिधान!
काट दिया जो था बंधन,
मुक्त किया मेरा जीवन।
तेरी दया से लोक सुखी,
अपना है परलोक सुखी।
हे सद्गुरु! मैं हूँ नादान,
दे दो भक्ति का वरदान।
हे सद्गुरु! हे दयानिधान!
बैर दिलों से दूर किया,
प्रेम, प्रीति का दान दिया।
सुख देने वाले दातार,
तेरी सदा हो जय जयकार।
धन-धन सद्गुरु देना ध्यान,
कर पायें हम अमृत पान।
हे सद्गुरु! हे दयानिधान!
स्वरचित - - > दिवाकर प्रसाद
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