हमारे अवचेतन मन के पास इतनी समझदारी है कि वह सभी सवालों के जवाब जानता है। बहरहाल इसे पता नहीं होता है कि यह जानता है। यह हमारे साथ न तो बहस ही करता है और न पलटकर जवाब ही देता है। हम भले ही अपने चेतन मन में बाधा, अवरोध और विलंब की कल्पना करते हैं। नतीजतन हम अपने अवचेतन मन की बुद्धिमत्ता और ज्ञान का लाभ नहीं ले पाते हैं। हमें यह चाहिए कि डर, अज्ञान और अंधविश्वास के बजाय शाश्वत सत्यों और जीवन के सिद्धांतों के दृष्टिकोण से सोचना शुरू करें। दूसरों को अपने लिए सोचने की अनुमति न दें। अंततः हम पायेंगे कि हमारा अवचेतन मन उसे स्वीकार कर लेगा और हकीकत बना देगा।
।। श्री परमात्मने नमः।।
Tuesday, 13 March 2018
अवचेतन मन
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