भीतर से बाहर की चीजें देखूँ तो कैसे देखूँ , मन के भीतर धूप खिली है आँखों में अँधियारा दिन ! कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ घर-घर की ये बातें हैं, दाता ने मुझको दे डाला इक नीरस नाकारा दिन !! ।। श्री परमात्मने नमः।।
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