Saturday, 24 March 2018

नाकारा दिन

भीतर से बाहर की चीजें देखूँ तो कैसे देखूँ ,
मन के भीतर धूप खिली है आँखों में अँधियारा दिन !
कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ घर-घर की ये बातें हैं,
दाता ने मुझको दे डाला इक नीरस नाकारा दिन !!
।। श्री परमात्मने नमः।।

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