हम नकारात्मक नजरियों के साथ पैदा नहीं हुए थे। हमने कभी यह सोचकर देखा है कि हमने कितनी बार क्रोधित होकर, डरकर, जलकर या बदले की भावना से खुद को कितना नुक़सान पहुँचाया है? जब हम नकारात्मक सोच से खुद को नुकसान पहुँचाते हैं तो ये जहर हमारे अवचेतन मन में दाखिल हो जाते हैं। जब हम अवचेतन मन को जीवनदायी विचार देंगे तो इसके भीतर से सभी नकारात्मक विचार मिटने लग जायेंगे। जब हम यह काम लगातार करते हैं तो सारा अतीत मिट जायेगा और अवचेतन मन उसे भुला देगा।
।। श्री परमात्मने नमः।।
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