दम्भ कितनों ने किया बेदाग दामन का मगर कौन सुनेगा किसे सुनाऊँ? बदबू उनके पास में, देखते हैं सब मगर कोई पकड़ पाता नहीं जिंदगी है उड़ रही इस तरह उपहास में! ।। श्री परमात्मने नमः।।
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