जिस दिन हम ये समझ जायेंगे कि सामने वाला व्यक्ति गलत नहीं है सिर्फ उसकी सोच हमसे अलग है उस दिन हमारे जीवन से दुःख समाप्त हो जायेंगे। यदि हम बड़प्पन के अभिलाषी हैं तो प्रभु के साथ-साथ हमें सबके सामने झुकना पड़ेगा क्योंकि बड़प्पन वह गुण है जो पद से नहीं संस्कारों से प्राप्त होता है।
।। श्री परमात्मने नमः।।
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