हम दूसरों को जैसा बनाना चाहते हैं पहले स्वयं वैसे बनें। यदि हम अशांत और चिड़चिड़े हैं और चिल्ला-चिल्लाकर अप्रिय शब्द बोलते हैं तो अपने आप को बदलें! अपने आसपास के लोगों के अंत: करणों में परिवर्तन लाने का यही सबसे अच्छा उपाय है और तभी ग्रामीण-परवेश में सकारात्मक बदलाव संभव है।
।। श्री परमात्मने नमः।।
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