हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का,
एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का।
बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते,
यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का। जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बिताइए
रोने का टाइम कहाँ सिर्फ मुस्कुराइए।
चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा,
बस याद रखिये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा।
Friday, 31 March 2017
जिंदगी का दस्तूर
Thursday, 30 March 2017
द्वादश ज्योतिर्लिंग
चिता-भूमि में वैद्यनाथ,तरन-तारन विश्वनाथ,
विश्वनाथ-२ तू काशी में विश्वनाथ, चिताभूमि..........
द्वादश ज्योतिर्लिंग पुजाया,नर-नारी को तू हरषाया,
सब नाथन में विश्वनाथ, तरण-तारण विश्वनाथ,
राम बड़ा तू बड़ा राम से, तू ही अलगअलग है नाम से,
भजले प्यारे एक साथ,तरण-तारण विश्वनाथ.............
बैद्यनाथ में लिंग कामना,जन-जन में है यही धारना,
तू ही सहारा थाम ले हाथ,तरण-तारण विश्वनाथ............
।।श्री परमात्मने नमः।।
Wednesday, 29 March 2017
आराधना
पुन: हो राम-कृष्ण अवतार...
अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी,
त्राहिमाम है जनता सारी,
बलत्कार,अपहरण से *मैया* !
करदे अब उद्धार,पुन: हो.....
आशा,तड़पन,संगम,क्रंदन,
तुझको किस विधि करुँ नतवंदन?
*जय माता दी*! प्रतिदिन,प्रतिक्षण,
बदल रहा संसार. पुन: हो.....
Tuesday, 28 March 2017
होता जीवन का उद्धार
*होता जीवन का उद्धार*
*****************
मन का मिटता अहंकार जब,
तब आता है सत्य विचार।
छोड़ के अपने मनमत को हम
करलें हर मानव से प्यार।।
जीवन का कुछ नहीं भरोसा
व्यर्थ करें हम क्यों तकरार।
जबतक जीना प्यार से जीना
सुंदर कर लें हम व्यवहार।।
वैर विरोध को छोड़ के सारे
करलें हर मानव से प्यार।
राजा-रंक दीन दु:खियों के
लिए खुला है यह दरबार।।
ईश्वर सत्गुरु दोनों एक
जब आता है सत्य विचार।
सत्गुरु कृपा बरसती सबपर
होता जीवन का उद्धार।।
।।श्री परमात्मने नमः।।
रचयिता-> दिवाकर प्रसाद
Monday, 27 March 2017
योग
योग में तो संपूर्ण शरीर को ही विभक्त कर दिया गया है : मन का एक हिस्सा पुरुष है तो मन का दूसरा हिस्सा स्त्री है और व्यक्ति को सूर्य से चंद्र की ओर बढ़ना है फिर अंत में दोनों के भी पार जाना है। दोनों का अतिक्रमण करना है। यही वास्तविक योग है।
।।श्री परमात्मने नम:।।
याद
गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया!
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया!
थक के जब सितारों से पनाह ली!
नींद आई तो हे प्रभु! तेरी याद ने सोने न दिया!
Saturday, 25 March 2017
ईश्वर
ईश्वर अप्रामाणिक नहीं हैं बल्कि हमारे साधन ही स्वल्प हैं जिनके आधार पर अभी उस तत्त्व का प्रत्यक्षीकरण सम्भव नहीं हो पा रहा है।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Friday, 24 March 2017
विनय
सुनले विनय सरस्वती मॉ हमारी
राष्ट्रहित से स्व हित का अधिक मूल्य देकर
भंवर के ही घेरे में अटके थे हम मॉ !
आलोचना ही थी नियति हमारी
मंजिल से अबतक भटके थे हम मॉ !
सबके भले में है अपनी भलाई
जन्नत का अब तो नजारा दिखा मॉ !
प्रगति की राहों पे चलना सिखा माँ
दुर्गति की जिंदगी से अब तो बचा मॉ !
तेरी रजा में ही राजी रहें हम
हर रात की जैसे होती सुबह मॉ !
सुनले विनय सरस्वती माँ हमारी
कदमों पे हम तेरे झुकते रहें मॉ !
(स्वरचित)
Wednesday, 15 March 2017
आखिरी चाबी
लगातार हो रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Tuesday, 14 March 2017
टिकाऊ पन
जल्द मिलने वाली चीज़ें ज्यादा दिन तक नहीं चलतीं और जो चीजें ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्द नहीं मिलती।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Monday, 13 March 2017
आईना
मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है वर्ना भींगी पलकों से तो आईना भी धुंधला नजर आता है।
।।श्रघ परमात्मने नमः।।
Sunday, 12 March 2017
होली
आप भी झूमे मस्ती में;
हम भी झूमे मस्ती में;
शोर हुआ सारी बस्ती में;
मस्त मस्त ये मस्ती रहे सदा आपकी
कश्ती में;
मुबारक हो होली भीगी मस्ती में.
।।श्री परमात्मने नमः।।
Saturday, 11 March 2017
साथ
शुक्र गुजार हूँ उन तमाम लोगों का जिन्होंने बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ दिया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि मैं मुसीबतों से अकेले ही निपट सकता हूँ। परमपिता परमेश्वर जो मेरे साथ हैं।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Friday, 10 March 2017
Thursday, 9 March 2017
स्वप्नवत संसार
सम्राट सपने में सम्राट नहीं रह जाता है और भिखारी सपने में भिखारी नहीं रह जाता है अर्थात् उस सपने की तरह यह संसार भी स्नप्नवत है, सत्य तो बस परमपिता परमात्मा ही हैं, सत्य तो केवल और केवल शिव हैं जो सुंदर भी हैं, बाकी सब माया है.
|| श्री परमात्मने नम: ||
Wednesday, 8 March 2017
अंत
हमने अपना पूरा समय दूसरों का बुरा करने में निकाल दिया और अपना जीवन खतरे में डाल दिया। अतः तुम्हारा अन्त निश्चित है।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Tuesday, 7 March 2017
पतन
जो समय गुरु-सेवन व भक्ति में लगाना है वह यदि जड़ पदार्थों में लगाया तो हम भी जड़त्व को प्राप्त हो जायेंगे। हमने अपना सामर्थ्य, शक्ति, पैसा और सत्ता अपने मित्रों व सम्बन्धियों में ही मोहवश लगाया तो याद रखिए कभी-न-कभी हम ठुकराये जायेंगे, दुःखी बनेंगेे और हमारा पतन हो ही जायेगा।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Monday, 6 March 2017
अमावस की रात
अमावस की रात का रहस्य देखा? अमावस
की रात की गहराई देखी? मगर जो अंधेरे से डरता है, वह तो आंख ही बंद करके बैठ जाता है, अमावस को देखना ही नहीं चाहता। जो अंधेरे से डरता है, वह तो अपने द्वार-दरवाजे बंद करके खूब रोशनी जला लेता है। वह अंधेरे को झुठला देता है। अमावस की रात आकाश में चमकते तारे देखे? दिन में वे तारे नहीं होते। दिन में वे तारे नहीं हो सकते। दिन की वह क्षमता नहीं है।वे तारे तो रात के अंधेरे में, रात के सन्नाटे में ही प्रकट होते हैं। वे तो रात की पृष्ठभूमि में ही आकाश में उभरते हैं और नाचते हैं। ऐसे ही उदासी के भी अपने मजे हैं, अपने स्वाद हैं, अपने रस हैं।
~ओशो~
Sunday, 5 March 2017
उद्धार
हर घट भीतर, हर इक जन से
प्रभु समझकर करलें प्यार।
हर घट भीतर हर इक जन से
प्रभु समझ करलें सत्कार।।
इक का ही केवल गुण गायें
इक का ही करलें दीदार।
इसी एक से जग को जोड़ें
करलें जीवन नौका पार।।
एक को सुमिरें श्वास श्वास पर
दूजे के संग ना हो प्यार।।
समझें प्रभु को हर घट भीतर
तब होगा जीवन उद्धार।।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Saturday, 4 March 2017
जीवन-मुक्त
ईश्वर प्राप्ति या जीवन मुक्त होने का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि मानव मात्र से एक-सा प्रेम हो जाता है। हृदय में भेदभाव नहीं रहता। मानव प्रेम का दायरा धीरे धीरे बढ़ता है। पहले तो अपने यहाँ के प्रत्येक सत्संगी से निश्छल प्रेम हो जाये फिर आगे चल कर देशवासियों और उससे आगे विश्ववासियों से एक सा प्रेम हो जाये तो समझिए हमने बाजी मार ली।
।।श्री परमात्मने नमः।।
जीवन-मुक्त
ईश्वर प्राप्ति या जीवन मुक्त होने का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि मानव मात्र से एक-सा प्रेम हो जाता है। हृदय में भेदभाव नहीं रहता। मानव प्रेम का दायरा धीरे धीरे बढ़ता है। पहले तो अपने यहाँ के प्रत्येक सत्संगी से निश्छल प्रेम हो जाये फिर आगे चल कर देशवासियों और उससे आगे विश्ववासियों से एक सा प्रेम हो जाये तो समझिए हमने बाजी मार ली।
।।श्री परमात्मने नमः।।
Friday, 3 March 2017
परमानंद
दुनिया में कोई भी आदमी परफेक्ट नहीं होता है. बेहतर है कि हम लोगों को छोड़ने की बजाय उनके साथ एडजस्ट करना सीखें क्येंकि मानव जीवन बड़ा ही अद्भुत है. दोस्त का दुश्मन बन जाना और दुश्मन का दोस्त बन जाना प्रकृति की व्यवस्था है. दोनों स्थितियों में चाह है जिसमें एक जोड़ता है और दूसरा तोड़ता है. एक अस्तित्व है तो दूसरा विरक्ति. एक अभिव्यक्ति तो दूसरा प्रेरणा. फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों एक दूसरे को जानने का प्रयास नहीं करते. बस जरुरत है इस परिवर्तनशील संसार में हमें शाश्वत आनंद प्राप्त करने के लिए परमानंद को पकड़ना होगा तभी जीवन सफल होगा.
।।श्री परमात्मने नमः।।
Thursday, 2 March 2017
प्रेम
प्रेम जगत में सार बन्दे, प्रेम जगत में सार।
हमें हमेशा है बढ़ाना नफरत को तज प्यार।।
जो पल-पल घटता बढ़ता है प्रेम नहीं वह होता।
पर संतों का प्रेम अडिग और अडोल है होता।।
Wednesday, 1 March 2017
महात्मा
संसार में सबसे प्रथम अपना व्यवहार संभालना चाहिए क्योंकि जिनके व्यवहार अच्छे हैं वही महात्मा हैं।