मन के कुछ नियम हैं, मन के कुछ खेल हैं, उनमें एक नियम यह है कि जो चीज उपलब्ध हो जाए मन उसे भूलने लगता है जो मिल जाए, उसकी विस्मृति होने लगती है। जो पास हो, उसे भूल जाने की संभावना बढ़ने लगती है ! मन उसकी तो याद करता है जो दूर हो, मन उसके लिए तो रोता है जो मिला न हो और जो मिल जाए, मन उसे धीरे-धीरे भूलने लगता है ! मन की आदत सदा भविष्य में होने की है, वर्तमान में होने की नहीं !
No comments:
Post a Comment