हम बूढ़े तब होते हैं जब हम जीवन में दिलचस्पी खो देते हैं, सपने देखना छोड़ देते हैं, नई सच्चाइयों के भूखे नहीं रहते हैं और जीतने के लिए नए संसारों की खोज नहीं करते हैं! जबतक हमारा मस्तिष्क नए विचारों और रुचियों के लिए खुला होता है, जबतक हम पर्दा उठाकर धूप अंदर आने देते हैं, जबतक हम जीवन तथा ब्रह्मांड की नई सच्चाइयों की प्ररेणा को ग्रहण करते हैं, तबतक हम युवा और स्फूर्तिवान बने रहते हैं।
।। श्री परमात्मने नमः।।
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