परमात्मा कभी भी हमारा भाग्य नहीं लिखता। जीवन के हर कदम पर हमारी सोच, हमारे व्यवहार एवं हमारे कर्म ही हमारे भाग्य लिखते हैं। ।। श्री परमात्मने नमः।।
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