हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं! जो कार्य हमारे सामने है वह हमारी शक्ति से परे नहीं है! उस कार्य को पूरा करने के लिए जो कष्ट सहना पड़ेगा वह भी हमारी सहन शक्ति से अधिक नहीं है! हमें जबतक अपने जीवन, प्रयोजन और जीतने की अजेय इच्छाशक्ति पर विश्वास है सफलता हमसे अधिक दूर नहीं रह सकती!
।। श्री परमात्मने नमः।।
No comments:
Post a Comment