Monday, 31 July 2017

समस्या

कितने जिस्मों पे नहीं आज भी कपड़ा कोई,
इस समस्या पे तो आयोग न बैठा कोई?
बात कुर्सी की बहुत गर्म है चौराहों पर,
डूबते गाँव की करता नहीं चर्चा कोई?
इस नये दौर के लोगों को दिखाने के लिए,
दर्द पर डाल दो मुस्कान का पर्दा कोई?
यूँ भटकती हुई मिलती है गरीबी अक्सर,
जिस तरह भीड़ भरे शहर में अंधा कोई?
चोर बनता नहीं बच्चा तो भला क्या बनता,
जब खिलौना नहीं बाजार में सस्ता कोई?
जब तलक भूख का उपचार न होगा दिवाकर,
पाठशाला में न पढ़ पायेगा बच्चा कोई?

No comments:

Post a Comment