Sunday, 16 July 2017

प्यार

प्यार दृग-धार है आचमन तो करो
अग्नि की शायिका है शयन तो करो
रूप को निर्वसन देखने के लिए
ज्योति-से पारदर्शी नयन तो करो
होठ चूमे शलभ के शिखा ने कहा
प्यार उत्सर्ग है अब गमन तो करो
बीन बोली बधिक से बहुत गूंजकर
लय समर्पित हिरण है हनन तो करो
प्राण पाषाण में भी पुजारी छिपे
पहले प्रतिमा के आगे 🔛 नमन तो करो
देह के द्वैत को तोड़ने के लिए
मीत अद्वैत का अध्ययन तो करो
प्यार के यज्ञ की पूर्णता के लिए
धीरे-धीरे अहं का हवन तो करो

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